Ganesh Visarjan 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और विसर्जन की पूरी जानकारी

Ganesh Visarjan 2026

गणेश चतुर्थी के साथ घर और पंडालों में विराजमान होने वाले भगवान गणेश की विदाई का समय भी नजदीक आता है। गणपति विसर्जन केवल मूर्ति को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसे भगवान गणेश को श्रद्धा और सम्मान के साथ विदा करने का धार्मिक संस्कार माना जाता है।

Ganesh Visarjan 2026 की बात करें तो इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई गई है, जबकि मुख्य गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा। हालांकि, सभी भक्त 10 या 11 दिन तक गणपति नहीं रखते। परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन बाद भी गणपति विसर्जन किया जाता है।

इस लेख में हमने स्थानीय पंचांग के अनुसार गणेश विसर्जन 2026 की तारीख, शुभ समय, चौघड़िया, पूजा विधि, मंत्र, पूजा सामग्री और जरूरी सावधानियों को आसान भाषा में समझाया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण विसर्जन का चौघड़िया भी कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

Ganesh Visarjan 2026 कब-कब किया जाएगा?

2026 में गणपति विसर्जन के लिए अलग-अलग परंपराओं के अनुसार कई तारीखें हैं। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 से शुरू हुई है। इसके बाद भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार गणपति को अलग-अलग दिनों में विदा कर सकते हैं।

गणपति रखने की अवधिGanpati Visarjan 2026 की तारीखदिन
1 दिन14 सितंबर 2026सोमवार
डेढ़ दिन15 सितंबर 2026मंगलवार
3 दिन16 सितंबर 2026बुधवार
5 दिन18 सितंबर 2026शुक्रवार
7 दिन20 सितंबर 2026रविवार
10 दिन23 सितंबर 2026बुधवार
11 दिन24 सितंबर 2026गुरुवार
अनंत चतुर्दशी का मुख्य विसर्जन25 सितंबर 2026शुक्रवार

पंचांग स्रोतों के अनुसार 15 सितंबर को डेढ़ दिन, 16 सितंबर को तीसरे दिन, 18 सितंबर को पांचवें दिन और 20 सितंबर को सातवें दिन विसर्जन के मुहूर्त दिए गए हैं। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का मुख्य विसर्जन होगा।

ध्यान रखें कि विसर्जन की तारीख केवल कैलेंडर देखकर तय करना जरूरी नहीं है। घर की परंपरा, स्थापना के समय और स्थानीय धार्मिक मान्यता को भी ध्यान में रखा जाता है।

गणेश विसर्जन कितने दिन बाद किया जाता है?

गणपति को कितने दिन घर में रखना है, इसकी एक ही अनिवार्य अवधि सभी परिवारों के लिए नहीं होती। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग परंपराएं प्रचलित हैं।

कई परिवार डेढ़ दिन के बाद गणपति का विसर्जन करते हैं, जबकि कुछ लोग 3, 5, 7 या 10 दिनों तक पूजा करते हैं। वहीं सार्वजनिक गणेश उत्सव में अनंत चतुर्दशी के दिन बड़े स्तर पर विसर्जन किया जाता है।

इसलिए अगर आपके परिवार में पहले से किसी विशेष दिन गणपति विसर्जन की परंपरा चली आ रही है, तो उसी परंपरा के अनुसार पूजा और विसर्जन करना उचित माना जाता है।

1, 3, 5, 7 और 10 दिन के गणेश विसर्जन की तारीख

2026 में गणपति विसर्जन की प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:

  • 1 दिन का विसर्जन: 14 सितंबर 2026
  • डेढ़ दिन का विसर्जन: 15 सितंबर 2026
  • 3 दिन का विसर्जन: 16 सितंबर 2026
  • 5 दिन का विसर्जन: 18 सितंबर 2026
  • 7 दिन का विसर्जन: 20 सितंबर 2026
  • 10 दिन का विसर्जन: 23 सितंबर 2026
  • अनंत चतुर्दशी: 25 सितंबर 2026

यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए कि पंचांग की गणना में अनंत चतुर्दशी को गणेश चतुर्थी के बाद 11वें दिन के रूप में भी बताया जाता है, जबकि लोकप्रिय रूप से पूरे गणेशोत्सव को 10 दिन का उत्सव कहा जाता है। इसी वजह से “10 दिन का गणपति” और “अनंत चतुर्दशी” को लेकर लोगों के बीच भ्रम देखने को मिलता है।

👉 अगर आप गणेश विसर्जन के साथ मथुरा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो Shri Krishna Janmabhoomi Temple के दर्शन, समय, पहुंचने का तरीका और जरूरी जानकारी भी BrajTrip पर जान सकते हैं।

Ganpati Visarjan 2026 का शुभ मुहूर्त और चौघड़िया

गणपति विसर्जन के लिए दिन में उपलब्ध शुभ, लाभ, अमृत और चर चौघड़िया को कई पंचांगों में उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, सही समय शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदलता है।

25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन मुख्य Ganpati Visarjan होगा। उदाहरण के लिए दिल्ली/नोएडा क्षेत्र के पंचांग में इस दिन प्रमुख चौघड़िया इस प्रकार हैं:

  • सुबह: 06:10 AM से 10:42 AM — चर, लाभ, अमृत
  • दोपहर: 12:12 PM से 01:43 PM — शुभ
  • शाम: 04:43 PM से 06:14 PM — चर
  • रात: 09:13 PM से 10:43 PM — लाभ

स्थानीय पंचांग में चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर रात 11:18 बजे शुरू होकर 25 सितंबर रात 11:06 बजे तक बताई गई है।

इसलिए विसर्जन के लिए अपने शहर का स्थानीय चौघड़िया देखना अधिक सही रहेगा।

Ganpati Visarjan 2026: दिल्ली, मुंबई समेत टॉप 10 शहरों का शुभ मुहूर्त

शहर बदलने पर सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में अंतर आता है और इसी कारण Ganpati Visarjan 2026 का चौघड़िया भी अलग हो सकता है। नीचे प्रमुख शहरों के लिए दिन के उपयोगी चौघड़िया दिए जा रहे हैं।

शहरसुबह का शुभ समयदोपहर का शुभ समयशाम का शुभ समय
दिल्ली/नोएडा06:11–10:42 AM12:13–01:44 PM04:45–06:15 PM
मुंबई06:28–11:00 AM12:31–02:01 PM05:02–06:33 PM
पुणे06:23–10:55 AM12:26–01:56 PM04:57–06:28 PM
जयपुर06:16–10:48 AM12:19–01:50 PM04:49–06:20 PM
अहमदाबाद06:29–11:00 AM12:31–02:01 PM05:02–06:33 PM
हैदराबाद06:05–10:37 AM12:07–01:38 PM04:39–06:09 PM
बेंगलुरु06:08–10:40 AM12:11–01:41 PM04:43–06:13 PM
चेन्नई05:58–10:30 AM12:01–01:32 PM04:32–06:03 PM
कोलकाता05:25–09:57 AM11:28 AM–12:58 PM03:59–05:30 PM
लखनऊ05:55–10:27 AM11:57 AM–01:28 PM04:29–05:59 PM

महत्वपूर्ण: सभी शहरों के लिए एक ही समय को लागू नहीं करना चाहिए। पंचांग गणना स्थान के अक्षांश-देशांतर और सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए मुंबई में 25 सितंबर को सुबह का चर-लाभ-अमृत समय 06:28 AM से 10:59 AM दिया गया है, जबकि नोएडा में यह 06:10 AM से 10:42 AM है।

इसलिए अपने शहर में विसर्जन करते समय local panchang के अनुसार समय देखना अधिक उचित है।

गणेश विसर्जन सुबह करें या शाम को? जानें सही समय

गणेश विसर्जन सुबह या शाम दोनों समय किया जा सकता है, लेकिन समय का चुनाव उस दिन के स्थानीय पंचांग और चौघड़िया के आधार पर करना बेहतर माना जाता है।

यदि दिन में शुभ चौघड़िया उपलब्ध है तो उस समय विसर्जन किया जा सकता है। कई स्थानों पर शाम के समय गणपति की शोभायात्रा निकालकर विसर्जन करने की परंपरा भी है।

इसलिए केवल “सुबह ही विसर्जन करना चाहिए” या “शाम को ही करना चाहिए” जैसी कोई एक बात सभी जगह लागू नहीं होती। स्थानीय पंचांग, परिवार की परंपरा और उपलब्ध शुभ समय को प्राथमिकता दें।

Ganpati Visarjan के लिए कौन सा मुहूर्त शुभ माना जाता है?

गणपति विसर्जन के लिए सामान्य रूप से शुभ, लाभ, अमृत और चर चौघड़िया को उपयोगी माना जाता है। इन चौघड़ियों में से जो समय आपके शहर के स्थानीय पंचांग में उपलब्ध हो, उसमें विसर्जन की तैयारी की जा सकती है।

अगर किसी कारण से चौघड़िया के समय विसर्जन संभव नहीं हो पाता, तो परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करके भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक विदा किया जा सकता है।

धार्मिक अनुष्ठान में समय के साथ श्रद्धा, स्वच्छता और विधि का पालन भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

गणेश विसर्जन की पूजा विधि: विसर्जन से पहले क्या करें?

विसर्जन से पहले घर पर भगवान गणेश की विधिवत विदाई पूजा की जाती है। इसके लिए सुबह या विसर्जन से पहले घर के पूजा स्थान को साफ कर लें।

विसर्जन से पहले पूजा की सामान्य विधि

  1. सबसे पहले भगवान गणेश के सामने दीपक और धूप जलाएं।
  2. गणेश जी को पुष्प, दूर्वा और अक्षत अर्पित करें।
  3. रोली या चंदन से तिलक करें।
  4. मोदक, लड्डू या अपनी परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करें।
  5. भगवान गणेश की आरती करें।
  6. परिवार के सभी सदस्य गणपति से सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करें।
  7. गणेश जी से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
  8. इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं।

विसर्जन के समय “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” जैसे जयकारों के साथ भगवान गणेश को विदा करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है।

गणेश विसर्जन के समय कौन सा मंत्र और आरती पढ़ें?

विसर्जन से पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हुए सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है।

गणेश मंत्र:

ॐ गं गणपतये नमः।

इसके अलावा गणेश जी की प्रचलित आरती “जय गणेश देवा” श्रद्धा से गाई जा सकती है।

आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान गणेश से प्रार्थना कर सकते हैं कि उनके घर में सुख, शांति, बुद्धि और समृद्धि बनी रहे।

विसर्जन के समय मंत्रों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धा और भाव माना जाता है, इसलिए परिवार अपनी परंपरा के अनुसार गणेश मंत्र, गणेश स्तुति या आरती कर सकता है।

गणपति विसर्जन के लिए पूजा सामग्री की पूरी सूची

विसर्जन से पहले पूजा के लिए सामान्य रूप से इन सामग्री की जरूरत पड़ सकती है:

  • रोली या कुमकुम
  • चंदन
  • अक्षत
  • दूर्वा
  • फूल और माला
  • धूप और अगरबत्ती
  • दीपक और घी/तेल
  • कपूर
  • नैवेद्य
  • मोदक या लड्डू
  • फल
  • सुपारी
  • नारियल
  • कलावा/मौली
  • गंगाजल
  • साफ कपड़ा
  • आरती की थाली

पूजा सामग्री की सूची परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक सूची को अनिवार्य न मानें।

Ganpati Visarjan के समय क्या करें और क्या न करें?

गणपति विसर्जन श्रद्धा के साथ-साथ जिम्मेदारी से करना भी जरूरी है।

क्या करें?

  • मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं।
  • पूजा सामग्री को अलग रखें।
  • संभव हो तो मिट्टी की या eco-friendly मूर्ति का इस्तेमाल करें।
  • स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल का उपयोग करें।
  • जल स्रोत को गंदा करने वाली सामग्री अलग से जमा करें।
  • बच्चों को विसर्जन के समय पानी से सुरक्षित दूरी पर रखें।

क्या न करें?

  • प्लास्टर ऑफ पेरिस या ऐसी सामग्री की मूर्ति को प्राकृतिक जलस्रोत में न डालें जहां स्थानीय नियम इसकी अनुमति न देते हों।
  • फूल-माला, प्लास्टिक और अन्य कचरा नदी या तालाब में न फेंकें।
  • गहरे पानी में जाकर स्वयं विसर्जन करने का जोखिम न लें।
  • पूजा के बाद बची सामग्री को इधर-उधर न छोड़ें।
  • स्थानीय प्रशासन के नियमों की अनदेखी न करें।

क्या घर पर गणेश जी का विसर्जन कर सकते हैं? जानें सही विधि

हां, कई परिवार घर पर ही गणेश जी का विसर्जन करते हैं, खासकर जब मूर्ति छोटी और मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी हो।

घर पर विसर्जन के लिए एक साफ बाल्टी, टब या उपयुक्त बड़े पात्र में पानी भरकर मूर्ति को श्रद्धापूर्वक विसर्जित किया जा सकता है। विसर्जन के बाद उस मिट्टी को पौधों या स्वच्छ स्थान पर इस्तेमाल करने की परंपरा भी अपनाई जा सकती है, यदि मूर्ति की सामग्री इसके लिए उपयुक्त हो।

हालांकि, मूर्ति के निर्माता द्वारा दिए गए निर्देश और स्थानीय नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

गणेश जी को विसर्जन से पहले कैसे विदा करें?

विसर्जन से पहले गणेश जी की अंतिम पूजा और आरती करके उन्हें विदा किया जाता है। घर के सभी सदस्य भगवान गणेश के सामने बैठकर प्रार्थना कर सकते हैं।

गणपति को नैवेद्य अर्पित करने के बाद परिवार के लोग हाथ जोड़कर घर में आने और पूजा स्वीकार करने के लिए धन्यवाद देते हैं। इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।

इस दौरान गणपति बप्पा के जयकारे लगाना और भक्ति गीत गाना कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा है।

गणेश विसर्जन के बाद पूजा सामग्री का क्या करें?

विसर्जन के बाद बची पूजा सामग्री को जलस्रोत में फेंकने से बचना चाहिए। फूल और पत्तियों जैसी जैविक सामग्री को स्थानीय व्यवस्था के अनुसार अलग किया जा सकता है।

प्लास्टिक, थर्मोकोल, पैकेजिंग और अन्य गैर-जैविक सामग्री को कूड़ेदान या स्थानीय waste collection व्यवस्था में देना चाहिए।

अगर घर पर मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन किया गया है तो पूरी तरह घुलने के बाद बची मिट्टी को पौधों में उपयोग करने की परंपरा अपनाई जा सकती है।

Ganesh Visarjan क्यों किया जाता है? जानें धार्मिक महत्व

हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को शुभारंभ, बुद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। गणेशोत्सव के दौरान भक्त भगवान गणेश की स्थापना करके नियमित पूजा करते हैं और अंत में विसर्जन के माध्यम से उन्हें विदा करते हैं।

विसर्जन को आगमन और प्रस्थान, सृजन और विलय के प्रतीक के रूप में भी समझा जाता है। गणेश प्रतिमा का जल में विलय यह संदेश देता है कि संसार की भौतिक वस्तुएं स्थायी नहीं हैं।

इसी कारण Ganpati Visarjan केवल उत्सव का अंतिम कार्यक्रम नहीं, बल्कि श्रद्धा, कृतज्ञता और प्रकृति के साथ जुड़ी धार्मिक भावना का हिस्सा माना जाता है।

गणेश विसर्जन की कथा और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

गणेश विसर्जन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में मिलती हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश को घर या पंडाल में स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है और उत्सव के बाद उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है।

एक लोकप्रिय धार्मिक भाव यह है कि भगवान गणेश अपने भक्तों के घर कुछ समय के लिए आते हैं, उनकी पूजा स्वीकार करते हैं और फिर अपने धाम लौट जाते हैं। इसलिए विसर्जन को भगवान की विदाई के रूप में देखा जाता है।

क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार विसर्जन की अवधि और पूजा की विधि अलग हो सकती है।

गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का क्या संबंध है?

अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है और इसी दिन गणेशोत्सव का प्रमुख समापन होता है।

2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को है। पंचांग के अनुसार इस दिन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:06 बजे तक रहेगी। इसी दिन गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी दोनों का पर्व है।

इसलिए 25 सितंबर को होने वाला विसर्जन गणपति उत्सव का सबसे प्रमुख विसर्जन माना जाता है।

अनंत चतुर्दशी 2026 पर गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त

25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन शहर के अनुसार चौघड़िया अलग रहेगा।

नोएडा/दिल्ली क्षेत्र के स्थानीय समय के अनुसार प्रमुख समय:

  • सुबह 06:10 से 10:42 बजे तक — चर, लाभ, अमृत
  • दोपहर 12:12 से 01:43 बजे तक — शुभ
  • शाम 04:43 से 06:14 बजे तक — चर
  • रात 09:13 से 10:43 बजे तक — लाभ

इनमें से किसी समय को चुनने से पहले अपने स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर है, क्योंकि कुछ मिनटों का अंतर शहर के अनुसार हो सकता है।

गणेश विसर्जन के दिन क्या दान करना चाहिए?

गणेश विसर्जन के दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान किया जा सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, फल, वस्त्र या उपयोगी वस्तुएं देना एक सामान्य धार्मिक परंपरा है।

कुछ लोग इस दिन अन्नदान या गौसेवा भी करते हैं। दान करते समय दिखावे की बजाय अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

यदि दान करना संभव न हो तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या पर्यावरण की स्वच्छता में योगदान देना भी सेवा का एक अच्छा माध्यम हो सकता है।

👉 गणेश विसर्जन के साथ अगर आप मथुरा, वृंदावन और ब्रज के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो BrajTrip पर ब्रज यात्रा, मंदिरों और दर्शनीय स्थलों से जुड़ी उपयोगी जानकारी भी देख सकते हैं।

Ganpati Visarjan 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. 2026 में गणेश चतुर्थी कितने दिन की है?

Ans. 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को है और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को होगी। आम बोलचाल में गणेशोत्सव को 10 दिन का उत्सव कहा जाता है, लेकिन पंचांग की दिन-गणना में अनंत चतुर्दशी को गणेश चतुर्थी के बाद 11वें दिन के रूप में भी बताया जाता है। इसी वजह से 10 दिन और 11 दिन को लेकर भ्रम होता है।

Q2. गणपति 10 दिन का है या 11 दिन का?

Ans. दोनों शब्द अलग संदर्भ में इस्तेमाल होते हैं। गणेशोत्सव को सामान्य रूप से 10 दिन का उत्सव कहा जाता है, जबकि गणेश चतुर्थी के दिन से गिनने पर अनंत चतुर्दशी 11वें दिन पड़ती है। 2026 में चतुर्थी 14 सितंबर और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर है। इसलिए पंचांग की गणना और लोकप्रिय परंपरा को समझने पर यह अंतर स्पष्ट हो जाता है।

Q3. 21 दिनों के लिए कौन सा गणपति है?

Ans. 21 दिनों तक गणपति रखने की कोई ऐसी एक सार्वभौमिक परंपरा नहीं है जिसे सभी परिवारों पर लागू किया जाए। कुछ विशेष धार्मिक संकल्प, व्रत या क्षेत्रीय परंपराओं में लंबे समय तक गणेश पूजा की जा सकती है, लेकिन सामान्य घरेलू गणपति विसर्जन के लिए डेढ़ दिन, 3, 5, 7 या 10 दिन जैसी परंपराएं अधिक प्रचलित हैं।

यदि आपके परिवार में 21 दिन तक गणपति रखने की परंपरा है, तो स्थानीय पुरोहित या परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा-विसर्जन की तिथि तय करना उचित रहेगा।

Q4. क्या गणपति को 7 दिन तक रख सकते हैं?

Ans. हां, 7 दिन तक गणपति रखने और सातवें दिन विसर्जन करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। 2026 में सातवें दिन का गणपति विसर्जन 20 सितंबर, रविवार को होगा। उस दिन का सही चौघड़िया आपके शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।

Q5. गणपति का अंतिम दिन कौन सा है?

Ans. 2026 में गणपति विसर्जन का प्रमुख अंतिम दिन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार है। यह दिन अनंत चतुर्दशी है और इसी दिन बड़े स्तर पर Ganpati Visarjan किया जाता है। चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात से शुरू होकर 25 सितंबर की रात तक रहने की पंचांग गणना दी गई है।

Q6. क्या गणेश जी की मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए?

Ans. ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि गणेश जी की मूर्ति घर में नहीं रखी जा सकती। श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की स्थापना करके नियमित पूजा की जाती है। हालांकि, स्थापना के बाद पूजा और विसर्जन की परंपरा को परिवार अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार निभाता है।

यदि मूर्ति स्थापना की जा रही है तो पूजा स्थान को साफ रखना, नियमित पूजा करना और निर्धारित अवधि के बाद श्रद्धापूर्वक विसर्जन करना उचित माना जाता है।

Q7. गणेश को पानी में कैसे छोड़ें?

Ans. गणेश जी की मूर्ति को अचानक पानी में फेंकने के बजाय पहले अंतिम पूजा और आरती करें। इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं और सुरक्षित तरीके से पानी में प्रवाहित करें।

अगर घर पर विसर्जन कर रहे हैं तो उपयुक्त पात्र में पानी भरकर छोटी मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन किया जा सकता है। बड़े या भारी प्रतिमाओं के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का उपयोग करना बेहतर है।

Q8. क्या बिना विसर्जन के गणपति रख सकते हैं?

Ans. गणेश स्थापना और विसर्जन की परंपरा अलग-अलग परिवारों में अलग हो सकती है। यदि आपने गणपति की स्थापना विशेष अवधि के संकल्प के साथ की है तो उस संकल्प के अनुसार पूजा और विसर्जन करना चाहिए।

यदि किसी विशेष परिस्थिति के कारण विसर्जन को लेकर असमंजस है, तो परिवार के पुरोहित या स्थानीय धार्मिक परंपरा जानने वाले व्यक्ति से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

Q9. क्या हम घर पर गणेश विसर्जन कर सकते हैं?

Ans. हां, छोटी मिट्टी या eco-friendly गणेश मूर्ति का घर पर विसर्जन किया जा सकता है। इसके लिए साफ पानी से भरा उचित आकार का पात्र इस्तेमाल किया जा सकता है।

मूर्ति पूरी तरह घुलने के बाद बची प्राकृतिक मिट्टी को साफ स्थान या पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है, यदि मूर्ति की सामग्री इसके अनुकूल हो। पूजा सामग्री और गैर-जैविक कचरे को अलग रखना चाहिए।

Q10. विसर्जन के दौरान गणेश की मूर्ति टूट जाए तो क्या होगा?

Ans. विसर्जन के दौरान मूर्ति का कोई हिस्सा टूट जाना अपने आप में किसी अनिष्ट का निश्चित संकेत नहीं माना जाना चाहिए। मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री की मूर्ति पानी में घुलते समय टूटना सामान्य प्रक्रिया भी हो सकती है।

ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान गणेश का स्मरण करते हुए श्रद्धा से पूजा पूरी करें और मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जित करें। यदि आपके परिवार में ऐसी स्थिति के लिए कोई विशेष धार्मिक परंपरा है, तो उसी का पालन किया जा सकता है।

Ganesh Visarjan 2026: ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

गणपति विसर्जन का उद्देश्य भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक विदा करना है। इसलिए केवल शुभ मुहूर्त देखने के साथ-साथ पर्यावरण और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

विशेष रूप से स्थानीय पंचांग के अनुसार समय, परिवार की परंपरा, मूर्ति की सामग्री और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल को ध्यान में रखें। शहर बदलने पर चौघड़िया में अंतर हो सकता है, इसलिए किसी दूसरे शहर का समय अपने शहर में सीधे लागू न करें।

निष्कर्ष

Ganesh Visarjan 2026 में गणपति विसर्जन की प्रमुख तिथि 25 सितंबर 2026, शुक्रवार, अनंत चतुर्दशी है। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार 15 सितंबर को डेढ़ दिन, 16 सितंबर को तीसरे दिन, 18 सितंबर को पांचवें दिन और 20 सितंबर को सातवें दिन भी गणपति का विसर्जन कर सकते हैं। 23 सितंबर को 10 दिन की अवधि पूरी होने पर भी विसर्जन की परंपरा है।

विसर्जन से पहले गणेश जी की पूजा, आरती, मंत्र जाप और नैवेद्य अर्पित करके उन्हें श्रद्धा से विदा करें। साथ ही अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार Ganpati Visarjan Muhurat जरूर देखें, क्योंकि शुभ समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

पंचांग और तारीखों से संबंधित डिस्क्लेमर

Disclaimer: इस लेख में दी गई Ganesh Visarjan 2026 की तारीखें, तिथि और मुहूर्त उपलब्ध स्थानीय पंचांग गणनाओं के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग गणना में अंतर होने के कारण मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-विधि और विसर्जन की परंपरा परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक संकल्प या व्यक्तिगत पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग और परिवार के पुरोहित/आचार्य से अंतिम पुष्टि अवश्य कर लें।

Scroll to Top