Shardiya Navratri 2026: पूजा विधि, कलश स्थापना और 9 दिनों की पूरी जानकारी

Shardiya Navratri 2026

Shardiya Navratri 2026 हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। नवरात्रि के इन दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत, पूजा, पाठ, आरती और कन्या पूजन करते हैं।

अगर आप Navratri 2026 को लेकर यह जानना चाहते हैं कि नवरात्रि कब से शुरू होगी, कलश स्थापना कब होगी, पूजा की सही विधि क्या है, पूजा सामग्री में क्या-क्या चाहिए, नौ दिनों में किस देवी की पूजा होगी, माता को कौन सा भोग लगाना चाहिए और कन्या पूजन कब किया जाएगा, तो यह लेख आपके लिए है।

इस लेख में Navratri puja vidhi, कलश स्थापना, व्रत के नियम, नौ दिनों की पूजा, भोग, कन्या पूजन, navratri gifts, navratri gifts for kanya और kanya pujan gifts से जुड़ी जानकारी को एक ही जगह आसान भाषा में समझाया गया है।

BrajTrip.in पर दी गई जानकारी: इस लेख में दी गई तिथियों और धार्मिक जानकारी को उपलब्ध पंचांग के आधार पर तैयार किया गया है तथा पूजा संबंधी विवरण को पंडित जी से पुष्टि और सत्यापन के बाद प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। अलग-अलग शहरों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू हो रही है?

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगी। इस दिन प्रतिपदा तिथि के साथ नवरात्रि का शुभारंभ और घटस्थापना की जाएगी। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी।

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। बहुत से परिवार इसी दिन से नौ दिनों का व्रत शुरू करते हैं।

Navratri 2026 में 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक नवरात्रि के नौ दिन माने जाएंगे। हालांकि इस वर्ष तिथियों की स्थिति के कारण अष्टमी और नवमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना जरूरी है। Mathura में 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महा नवमी दोनों का उल्लेख मिलता है।

Shardiya Navratri 2026 का आखिरी दिन कब है?

शारदीय नवरात्रि 2026 का नौवां दिन सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को होगा। Mathura और Vrindavan क्षेत्र के पंचांग में इस दिन दुर्गा अष्टमी और महा नवमी दोनों का उल्लेख है।

इसके अगले दिन मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। Mathura के लिए विजयदशमी का विजय मुहूर्त दोपहर 1:58 बजे से 2:43 बजे तक बताया गया है।

इसलिए अगर आप अष्टमी, नवमी, कन्या पूजन या हवन करने की तैयारी कर रहे हैं, तो अपने स्थानीय पंडित जी से उस दिन की पूजा विधि और मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

Navratri 2026 में कलश स्थापना कब होगी?

रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को प्रतिपदा तिथि के दिन कलश स्थापना की जाएगी। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी।

कलश स्थापना को Navratri 2026 की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। घर में कलश स्थापित करने के साथ ही कई परिवार अखंड ज्योति भी जलाते हैं और नौ दिनों तक माता की नियमित पूजा करते हैं।

कलश स्थापना का शुभ समय

शारदीय नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को होगी। घटस्थापना का मुहूर्त सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार शहर-दर-शहर अलग होता है। इसलिए अपने शहर के अनुसार नीचे दिया गया समय देखें।

शहरकलश स्थापना / घटस्थापना मुहूर्त
नई दिल्लीसुबह 6:20 बजे से 10:12 बजे तक
मुंबईसुबह 6:32 बजे से 10:27 बजे तक
कोलकातासुबह 5:31 बजे से 9:26 बजे तक
चेन्नईसुबह 5:59 बजे से 9:57 बजे तक
बेंगलुरुसुबह 6:10 बजे से 10:07 बजे तक
हैदराबादसुबह 6:08 बजे से 10:05 बजे तक
अहमदाबादसुबह 6:35 बजे से 10:29 बजे तक
जयपुरसुबह 6:24 बजे से 10:17 बजे तक
लखनऊसुबह 6:04 बजे से 9:56 बजे तक
पटनासुबह 5:46 बजे से 9:39 बजे तक

इन सभी समयों की गणना संबंधित शहर के स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के आधार पर की गई है।

जरूरी जानकारी: ऊपर दिए गए समय 11 अक्टूबर 2026 के लिए हैं। अलग-अलग पंचांगों में गणना पद्धति के कारण समय में 1–2 मिनट का अंतर मिल सकता है। इसलिए किसी अन्य शहर में रहने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए घटस्थापना मुहूर्त को प्राथमिकता दें।

कलश स्थापना की पूजा विधि

सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा हो तो उसे तैयार करें। कलश में जल भरें और उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्का आदि अपनी परंपरा के अनुसार डालें। कलश पर मौली बांधकर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें।

इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीपक से कलश तथा माता की पूजा करें। अंत में माता की आरती करके नवरात्रि के व्रत और पूजा का संकल्प लिया जा सकता है।

👉 शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें और पूजा की विधि को बेहतर तरीके से समझने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें।

👉 वीडियो क्रेडिट: “नवरात्रि कलश स्थापना कैसे करे जाने सम्पूर्ण विधि” — Acharya Shri Kaushik Ji Maharaj। वीडियो का पूरा श्रेय संबंधित YouTube चैनल और उसके मूल creator को जाता है।

Shardiya Navratri 2026 की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

Navratri puja vidhi को सही तरीके से करने के लिए पूजा सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहता है।

सामान्य पूजा सामग्री में शामिल हैं:

  • मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा
  • पूजा की चौकी
  • लाल या पीला कपड़ा
  • कलश
  • जल
  • नारियल
  • आम के पत्ते
  • जौ
  • रोली और कुमकुम
  • अक्षत
  • मौली/कलावा
  • लाल चुनरी
  • फूल और माला
  • धूप और अगरबत्ती
  • कपूर
  • दीपक और घी/तेल
  • फल
  • मिठाई
  • पान और सुपारी
  • पंचामृत
  • पूजा की थाली

हर परिवार में पूजा सामग्री की सूची थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री शामिल की जा सकती है।

Navratri puja Vidhi: रोज माता की पूजा कैसे करें?

Shardiya Navratri 2026 के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा श्रद्धा और नियमपूर्वक करने की परंपरा है। रोज सुबह पूजा स्थान की सफाई से लेकर दीपक जलाने, माता को भोग लगाने, पाठ और आरती करने तक कुछ सामान्य नियमों का पालन किया जाता है। आप अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार पूजा की विधि में बदलाव भी कर सकते हैं।

  • सुबह स्नान और पूजा स्थान की सफाई: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। यदि घर में कलश स्थापना की गई है, तो उसके आसपास की जगह भी साफ रखें।
  • दीपक और धूप जलाएं: पूजा शुरू करने से पहले घी या तेल का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती लगाएं। इसके बाद कुछ क्षण शांत होकर मां दुर्गा का ध्यान करें।
  • माता को पूजा सामग्री अर्पित करें: माता को रोली, अक्षत, फूल, माला और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद फल, मिठाई या उस दिन के अनुसार निर्धारित भोग चढ़ाएं।
  • पाठ और मंत्र जाप करें: अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र या अन्य स्तोत्र का पाठ करें। समय कम होने पर माता के मंत्र का जाप या कुछ समय ध्यान करना भी किया जा सकता है।
  • आरती और प्रार्थना करें: पूजा और पाठ पूरा होने के बाद माता की आरती करें। इसके बाद परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए माता से प्रार्थना करें।
  • भोग को प्रसाद के रूप में बांटें: माता को अर्पित किया गया भोग पूजा के बाद प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटें।
  • व्रत रखने वाले नियमों का ध्यान रखें: यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करें। व्रत के दौरान अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना जरूरी है।

Navratri 2026 में पूजा का उद्देश्य केवल लंबे समय तक पूजा-पाठ करना नहीं है। इन नौ दिनों में श्रद्धा, संयम, स्वच्छता और सकारात्मक भाव के साथ मां दुर्गा का स्मरण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियमित पूजा करें और इन दिनों को भक्तिभाव के साथ बिताएं।

1st Day of Navratri – मां शैलपुत्री की पूजा

तारीख: रविवार, 11 अक्टूबर 2026 | तिथि: प्रतिपदा

1st day of Navratri 2026 पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन भक्त माता से सुख, शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

1st Day of Navratri 2026 पर मां शैलपुत्री की पूजा विधि

सुबह स्नान करके पूजा स्थान की सफाई करें। माता की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल और चुनरी अर्पित करें।

माता शैलपुत्री का ध्यान करके माता की आरती करें। अगर आप नौ दिनों का व्रत रख रहे हैं तो पहले दिन संकल्प भी लिया जा सकता है।

मां को कौन सा भोग लगाएं?

मां को गाय के घी का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। आप घी से बना सात्विक प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं।

👉 पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि की पूरी जानकारी के लिए पितृ पक्ष 2026: तारीख, श्राद्ध तिथि, मुहूर्त और विधि हमारी विस्तृत गाइड पढ़ें।

2nd Day of Navratri – मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

तारीख: सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 | तिथि: द्वितीया

2nd day of Navratri 2026 पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप तप, साधना और संयम से जुड़ा माना जाता है।

2nd Day of Navratri 2026 पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

दूसरे दिन सुबह दीपक जलाकर माता को फूल, अक्षत और फल अर्पित करें। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करते हुए पूजा और आरती करें।

इस दिन पूजा करते समय मन को शांत रखना और माता का स्मरण करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी को कौन सा भोग लगाएं?

मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और पंचामृत का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। इसके साथ फल भी अर्पित किए जा सकते हैं।

3rd Day of Navratri – मां चंद्रघंटा की पूजा

तारीख: मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | तिथि: तृतीया

3rd Day of Navratri पर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी के मस्तक पर अर्धचंद्र होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

3rd Day of Navratri पर मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

माता की तस्वीर के सामने दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद फूल, अक्षत और रोली अर्पित करें। मां चंद्रघंटा का ध्यान और पूजा करने के बाद आरती करें।

अगर आपके परिवार में किसी विशेष मंत्र या पूजा विधि की परंपरा है तो उसे भी शामिल किया जा सकता है।

मां चंद्रघंटा को कौन सा भोग लगाएं?

मां चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाने की परंपरा है। भोग में घर पर बना सात्विक प्रसाद रखना अच्छा विकल्प हो सकता है।

4th Day of Navratri – मां कूष्मांडा की पूजा

तारीख: बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | तिथि: चतुर्थी

4th Day of Navratri पर मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। नवरात्रि के इस दिन भक्त माता की आराधना करके परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।

4th Day of Navratri पर मां कूष्मांडा की पूजा विधि

सुबह पूजा स्थान की सफाई करके दीपक जलाएं। माता को फूल और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए पूजा करें और आरती करें।

मां कूष्मांडा को कौन सा भोग लगाएं?

मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। आप अपनी सुविधा और परिवार की परंपरा के अनुसार फल या अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।

5th Day of Navratri – मां स्कंदमाता की पूजा

तारीख: गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 | तिथि: पंचमी

5th Day of Navratri पर मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां की गोद में भगवान कार्तिकेय को स्कंद के रूप में दर्शाया जाता है।

5th Day of Navratri पर मां स्कंदमाता की पूजा विधि

सुबह माता की पूजा के लिए दीपक जलाएं। फूल, अक्षत और फल अर्पित करने के बाद मां स्कंदमाता का ध्यान करें। पूजा के अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।

मां स्कंदमाता को कौन सा भोग लगाएं?

मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। केले के साथ अन्य फल भी प्रसाद के रूप में अर्पित किए जा सकते हैं।

6th Day of Navratri – मां कात्यायनी की पूजा

तारीख: शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | तिथि: षष्ठी

6th Day of Navratri पर मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी कात्यायनी को शक्ति और साहस के स्वरूप में पूजा जाता है।

6th Day of Navratri पर मां कात्यायनी की पूजा विधि

षष्ठी के दिन सुबह स्नान करके माता की पूजा करें। दीपक जलाने के बाद माता को फूल, अक्षत और रोली अर्पित करें। मां कात्यायनी का ध्यान करके आरती करें।

मां कात्यायनी को कौन सा भोग लगाएं?

मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। भोग के साथ फल और सात्विक प्रसाद भी रखा जा सकता है।

7th Day of Navratri – मां कालरात्रि की पूजा

तारीख: शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 | तिथि: सप्तमी

7th Day of Navratri पर मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति और नकारात्मकता से रक्षा से जुड़ा माना जाता है।

7th Day of Navratri पर मां कालरात्रि की पूजा विधि

माता के सामने दीपक जलाकर फूल और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद मां कालरात्रि का ध्यान करके पूजा और आरती करें।

इस दिन पूजा करते समय मन में भय के बजाय श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना चाहिए।

मां कालरात्रि को कौन सा भोग लगाएं?

मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। गुड़ से बने सात्विक प्रसाद का भी उपयोग किया जा सकता है।

👉 नवरात्रि से पहले पितरों की श्रद्धा और तर्पण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए पितृ अमावस्या 2026 कब है और इस दिन क्या करना चाहिए हमारी पूरी गाइड भी पढ़ें।

8th Day of Navratri – मां महागौरी की पूजा

तारीख: रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | तिथि: सप्तमी

यहां एक महत्वपूर्ण पंचांग स्थिति समझना जरूरी है। Mathura/Vrindavan क्षेत्र के उपलब्ध पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर को सप्तमी और 19 अक्टूबर को अष्टमी है। इसलिए केवल सामान्य इंटरनेट कैलेंडर के आधार पर अष्टमी की तारीख तय न करें।

8th Day of Navratri पर मां महागौरी की पूजा कैसे करें?

जब आपके स्थानीय पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि हो, उस दिन मां महागौरी की पूजा करें। दीपक जलाकर माता को फूल, अक्षत और भोग अर्पित करें।

अष्टमी के दिन कई परिवार विशेष पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन करते हैं।

मां महागौरी को कौन सा भोग लगाएं?

मां महागौरी को नारियल का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। इसके साथ घर में बनाया गया सात्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है।

9th Day of Navratri – मां सिद्धिदात्री की पूजा

तारीख: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | दुर्गा अष्टमी एवं महा नवमी

9th Day of Navratri को लेकर 2026 में विशेष स्थिति है। Mathura और Vrindavan के उपलब्ध पंचांग में 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी की पूजा और महा नवमी का उल्लेख है। Sandhi Puja भी इसी दिन बताई गई है।

वहीं 20 अक्टूबर को विजयदशमी और दुर्गा विसर्जन का उल्लेख है।

इसलिए मां सिद्धिदात्री की नवमी पूजा, कन्या पूजन या हवन का समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित करना चाहिए।

9th Day of Navratri पर मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

नवमी तिथि के अनुसार सुबह माता की पूजा करें। दीपक जलाकर फूल, अक्षत, फल और भोग अर्पित करें। परिवार की परंपरा हो तो इस दिन हवन और कन्या पूजन भी किया जा सकता है।

मां सिद्धिदात्री को कौन सा भोग लगाएं?

मां सिद्धिदात्री की पूजा में तिल, हलवा, पूड़ी और चने जैसे सात्विक प्रसाद का उपयोग कई परिवारों में किया जाता है। भोग की सामग्री अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।

Shardiya Navratri 2026 में व्रत के नियम क्या हैं?

नवरात्रि में व्रत रखने का तरीका हर परिवार में थोड़ा अलग हो सकता है। कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक फलाहार करते हैं, कुछ एक समय भोजन करते हैं और कुछ लोग अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं।

व्रत के दौरान सात्विक भोजन, संयम और नियमित पूजा पर ध्यान दिया जाता है।

Navratri 2026 व्रत में क्या खा सकते हैं?

व्रत में आमतौर पर फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, सामक चावल और सेंधा नमक जैसी चीजों का सेवन किया जाता है।

अगर आप पहली बार व्रत रख रहे हैं तो अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए भोजन की योजना बनाएं।

नवरात्रि व्रत में किन चीजों से बचना चाहिए?

व्रत की परंपरा में सामान्य अनाज, सामान्य नमक और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। हालांकि नियम क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकते हैं।

किसी बीमारी, दवा या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।

Navratri 2026 का व्रत पारण कब और कैसे करें?

shardiya Navratri 2026 का व्रत पारण मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा। जिन श्रद्धालुओं ने पूरे नौ दिनों का नवरात्रि व्रत रखा है, वे अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार नवमी पूजा पूरी करने के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।

व्रत पारण का समय सभी परिवारों के लिए एक जैसा नहीं होता। कुछ परिवार नवमी की पूजा और कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग नवमी तिथि पूरी होने के बाद अगले दिन दशमी पर पारण करते हैं। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी परंपरा के अनुसार पारण का समय निर्धारित करना चाहिए।

नवरात्रि व्रत पारण की विधि

व्रत पारण करते समय जल्दबाजी में भारी भोजन करने के बजाय हल्के और सात्विक भोजन से शुरुआत करना बेहतर रहता है।

  • सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और माता का ध्यान करें।
  • माता की पूजा और आरती करने के बाद उन्हें भोग अर्पित करें।
  • यदि आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन की परंपरा है, तो कन्या पूजन और भोजन के बाद व्रत खोलें।
  • व्रत खोलते समय फल, दूध, दही, नारियल पानी या हल्के सात्विक भोजन से शुरुआत कर सकते हैं।
  • इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामान्य भोजन ग्रहण करें।
  • लंबे समय तक व्रत रखने के बाद एक साथ बहुत अधिक या भारी भोजन करने से बचें।

क्या नवरात्रि व्रत का पारण नवमी को कर सकते हैं?

हां, कई परिवारों में नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। वहीं कुछ परिवार अगले दिन दशमी पर व्रत पारण करते हैं। दोनों परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में प्रचलित हैं।

Shardiya Navratri 2026 शारदीय नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियों की विशेष स्थिति को देखते हुए पारण की सही तिथि और समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग तथा पंडित जी की सलाह को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

जरूरी जानकारी: व्रत पारण का समय शहर, पंचांग और परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि करके ही पारण करें।

Navratri 2026 में कन्या पूजन कब किया जाता है?

नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाता है?

नवरात्रि में कन्या पूजन को विशेष धार्मिक परंपरा माना जाता है। आमतौर पर अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्याओं को देवी के स्वरूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। शारदीय नवरात्रि 2026 में Mathura के पंचांग के अनुसार सोमवार, 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि सुबह 10:52 बजे तक रहेगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। इसलिए 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों के अनुसार कन्या पूजन किया जा सकता है।

कन्या पूजन का शुभ समय

  • अष्टमी के अनुसार कन्या पूजन: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:52 बजे से पहले किया जा सकता है।
  • नवमी के अनुसार कन्या पूजन: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:52 बजे के बाद नवमी तिथि शुरू होने पर किया जा सकता है।
  • Mathura में 19 अक्टूबर को सूर्योदय: सुबह 6:21 बजे।
  • नवमी तिथि की शुरुआत: सुबह 10:52 बजे।
  • कन्या पूजन का समय तय करते समय परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित जी द्वारा बताई गई पूजा विधि को प्राथमिकता दें।

shardiya Navratri 2026 कन्या पूजन की विधि

कन्या पूजन के लिए सामान्य रूप से 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को आमंत्रित करने की परंपरा है। परिवार की श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार कन्याओं की संख्या अलग हो सकती है।

  • सबसे पहले घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें।
  • कन्याओं के घर आने पर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत करें।
  • उनके पैर धोकर साफ कपड़े या आसन पर बैठाएं।
  • कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में मानकर रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  • उन्हें श्रद्धापूर्वक पूड़ी, चना, हलवा और अन्य सात्विक भोजन कराएं।
  • भोजन के बाद कन्याओं को फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा दें।
  • Navratri gifts for kanya के रूप में स्टेशनरी, छोटी धार्मिक पुस्तक, चुनरी, फल या उपयोगी वस्तुएं भी दी जा सकती हैं।
  • अंत में कन्याओं का आशीर्वाद लेकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें।

कन्या पूजन में उपहार की कीमत से अधिक श्रद्धा, सम्मान और प्रेम को महत्व दिया जाता है। इसलिए महंगे kanya pujan gifts देना जरूरी नहीं है; अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सरल एवं उपयोगी उपहार देना पर्याप्त है।

Navratri Gifts और Kanya Pujan Gifts में क्या दें?

अगर आप कन्या पूजन के दौरान बच्चों को कुछ देना चाहते हैं तो महंगे उपहार देने की आवश्यकता नहीं है। उपयोगी और उम्र के अनुसार छोटी चीजें भी दी जा सकती हैं।

Navratri gifts for kanya के लिए आप इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:

  • छोटी पूजा की चुनरी
  • स्टेशनरी सेट
  • कॉपी और पेन
  • छोटी कहानी या धार्मिक पुस्तक
  • फल और मिठाई
  • हेयर एक्सेसरीज
  • पानी की बोतल
  • छोटा उपयोगी खिलौना
  • कपड़े
  • दक्षिणा

Kanya pujan gifts देते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उपहार की कीमत नहीं बल्कि सम्मान और श्रद्धा है।

Navratri 2026 में गरबा और डांडिया क्यों किया जाता है?

Navratri 2026 केवल पूजा और व्रत तक सीमित नहीं है। खासकर गुजरात और कई अन्य शहरों में Garba और Dandiya नवरात्रि समारोह का प्रमुख हिस्सा हैं।

गरबा में मां शक्ति की आराधना के साथ सामूहिक रूप से नृत्य किया जाता है। आजकल बड़े शहरों में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

अगर आप किसी Garba event में जा रहे हैं तो स्थानीय आयोजन की तारीख, समय, प्रवेश नियम और सुरक्षा संबंधी जानकारी पहले से जांच लेना अच्छा रहता है।

नवरात्रि में क्या करें और क्या नहीं करें?

नवरात्रि के नौ दिनों में पूजा-पाठ के साथ स्वच्छता, संयम और सात्विक जीवनशैली पर भी ध्यान दिया जाता है। हर परिवार में पूजा और व्रत की अपनी परंपराएं हो सकती हैं, इसलिए धार्मिक नियमों का पालन अपनी पारिवारिक मान्यता और स्थानीय परंपरा के अनुसार करना बेहतर है।

Shardiya Navratri 2026 में क्या करें?

  • पूजा स्थान साफ रखें: रोज पूजा से पहले पूजा स्थान और माता की चौकी की सफाई करें।
  • नियमित पूजा करें: अपनी सुविधा के अनुसार रोज माता की पूजा, आरती और मंत्र जाप करें।
  • सात्विक भोजन करें: व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करें।
  • माता को भोग लगाएं: रोज अपनी श्रद्धा और उस दिन की परंपरा के अनुसार माता को फल, मिठाई या भोग अर्पित करें।
  • सकारात्मक वातावरण रखें: इन दिनों घर में शांत और भक्तिपूर्ण वातावरण बनाए रखने का प्रयास करें।
  • जरूरतमंदों की मदद करें: अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान कर सकते हैं।
  • कन्या पूजन करें: अष्टमी या नवमी पर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन किया जा सकता है।

Shardiya Navratri 2026 में क्या नहीं करना चाहिए?

  • पूजा स्थान में गंदगी या अस्वच्छता न रहने दें।
  • व्रत रखने पर अपनी परंपरा के अनुसार जिन खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है, उनका सेवन न करें।
  • पूजा और व्रत को लेकर दिखावा या अनावश्यक खर्च करने से बचें।
  • इन दिनों अनावश्यक विवाद, क्रोध और कटु वचन से बचने का प्रयास करें।
  • किसी धार्मिक विधि के बारे में जानकारी स्पष्ट न हो तो सोशल मीडिया की किसी random जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें।
  • विशेष पूजा, हवन, व्रत या मुहूर्त से जुड़ी जानकारी के लिए स्थानीय पंडित, आचार्य या परिवार की धार्मिक परंपरा का मार्गदर्शन लेना बेहतर है।

नवरात्रि का मुख्य भाव श्रद्धा और भक्ति है। इसलिए पूजा को लेकर अनावश्यक दबाव लेने के बजाय अपनी क्षमता, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन नौ दिनों को शांतिपूर्वक और भक्तिभाव से मनाएं।

शारदीय नवरात्रि 2026 का धार्मिक महत्व

Shardiya Navratri 2026 में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन नौ रूपों को शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों से जोड़ा जाता है।

नवरात्रि के दौरान भक्त अपने घर में पूजा करते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं, व्रत रखते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

ब्रज क्षेत्र में भी नवरात्रि के दौरान मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ सकती है। अगर आप Mathura, Vrindavan या आसपास के धार्मिक स्थलों की यात्रा की योजना बना रहे हैं तो यात्रा से पहले मंदिर के दर्शन समय और स्थानीय व्यवस्था की जानकारी जांच लेना अच्छा रहेगा।

Shardiya Navratri 2026 से जुड़े सामान्य सवाल

Q1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?

Ans. शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगी।

Q2. Navratri 2026 का आखिरी दिन कब है?

Ans. नौ दिनों की नवरात्रि का नौवां दिन सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 है। Mathura में इस दिन दुर्गा अष्टमी और महा नवमी दोनों का उल्लेख है।

Q3. 1st Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

Q4. 2nd Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

Q5. 3rd Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

Q6. 4th Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।

Q7. 5th Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

Q8. 6th Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans.छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।

Q9. 7th Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।

Q10. 8th Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा की जाती है।

Q11. 9th Day of Navratri पर किस देवी की पूजा होती है?

Ans. नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। 2026 में Mathura/Vrindavan क्षेत्र में अष्टमी और महा नवमी की तिथि एक ही दिन से जुड़ी होने के कारण स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना जरूरी है।

Q12. 2026 में नवरात्रि कब पड़ेगी?

Ans. शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगी। इस दिन प्रतिपदा तिथि, घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होगा। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी (दशहरा) मनाया जाएगा।

Q13. पहला नवरात्र कितनी तारीख को है?

Ans. पहला नवरात्र रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को है। इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और इसी दिन घटस्थापना भी की जाती है।

Q14. शारदीय नवरात्र कितनी तारीख से है?

Ans. शारदीय नवरात्रि 2026, रविवार 11 अक्टूबर से शुरू होकर सोमवार 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महा नवमी से जुड़े अनुष्ठान हैं। इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी।

Q15. नवरात्रि के 9 दिन 9 देवी कौन हैं?

Ans. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है:

  1. पहला दिन – मां शैलपुत्री
  2. दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी
  3. तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा
  4. चौथा दिन – मां कूष्मांडा
  5. पांचवां दिन – मां स्कंदमाता
  6. छठा दिन – मां कात्यायनी
  7. सातवां दिन – मां कालरात्रि
  8. आठवां दिन – मां महागौरी
  9. नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री

इन नौ स्वरूपों को सामूहिक रूप से नवदुर्गा कहा जाता है। 2026 के शारदीय नवरात्रि कैलेंडर में भी इन्हीं स्वरूपों की पूजा क्रमशः निर्धारित है।

Q16. शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में क्या अंतर है?

Ans. शारदीय नवरात्रि आश्विन महीने में शरद ऋतु के दौरान आती है और सामान्यतः सितंबर या अक्टूबर में पड़ती है। इसे कई स्थानों पर महानवरात्रि भी कहा जाता है। इसके बाद विजयदशमी मनाई जाती है।

वहीं चैत्र नवरात्रि चैत्र महीने में वसंत ऋतु के दौरान आती है और सामान्यतः मार्च या अप्रैल में होती है। चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाता है।

दोनों नवरात्रियों में मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन इनके समय और उनसे जुड़ी प्रमुख धार्मिक परंपराओं में अंतर होता है। 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक और शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हुई।

Q17. शारदीय नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

Ans. शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा और शक्ति की आराधना का प्रमुख पर्व है। धार्मिक मान्यताओं में इसे अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय से जोड़ा जाता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं, माता की पूजा और पाठ करते हैं तथा अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और हवन जैसी परंपराओं का पालन करते हैं। नवरात्रि के बाद विजयदशमी का पर्व आता है, जिसे भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से भी जोड़ा जाता है।

Q18. नौ देवियों के नौ रंग कौन से हैं?

Ans. 2026 में नवरात्रि के नौ दिनों के लिए दिन के अनुसार ये रंग बताए गए हैं:

दिनतारीखदेवीनवरात्रि का रंग
पहला दिन11 अक्टूबरमां शैलपुत्रीनारंगी
दूसरा दिन12 अक्टूबरमां ब्रह्मचारिणीसफेद
तीसरा दिन13 अक्टूबरमां चंद्रघंटालाल
चौथा दिन14 अक्टूबरमां कूष्मांडारॉयल ब्लू
पांचवां दिन15 अक्टूबरमां स्कंदमातापीला
छठा दिन16 अक्टूबरमां कात्यायनीहरा
सातवां दिन17 अक्टूबरमां कालरात्रिग्रे
आठवां दिन18 अक्टूबरमां महागौरीबैंगनी
नौवां दिन19 अक्टूबरमां सिद्धिदात्रीपीकॉक ग्रीन

इन रंगों की परंपरा में पहले दिन का रंग उस दिन के वार के आधार पर निर्धारित होता है और उसके बाद रंगों का क्रम आगे बढ़ता है।

Q19. 9 देवियों में सबसे बड़ी देवी कौन हैं?

Ans. नवदुर्गा में किसी एक देवी को “सबसे बड़ी देवी” कहना उचित नहीं है। मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक सभी नौ स्वरूप आदिशक्ति मां दुर्गा के अलग-अलग रूप माने जाते हैं।

हर स्वरूप का अपना धार्मिक महत्व और विशेषता है। इसलिए भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार सभी नौ देवियों की पूजा करते हैं।

Q20. शारदीय नवरात्रि का पारण कब है?

ans. शारदीय नवरात्रि 2026 का पारण मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी और इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। उपलब्ध पंचांग के अनुसार नवरात्रि व्रत का पारण 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद किया जाएगा।

हालांकि कुछ परिवारों में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा होती है। इसलिए व्रत पारण की अंतिम विधि अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार रखें।

Shardiya Navratri 2026: निष्कर्ष

Navratri 2026 में 11 अक्टूबर से माता की आराधना शुरू होगी और 19 अक्टूबर को नौ दिनों का पर्व अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचेगा। 20 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी।

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, व्रत, भोग, पाठ, आरती और कन्या पूजन जैसी परंपराएं श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं। वहीं Garba और Dandiya जैसे सांस्कृतिक आयोजन भी नवरात्रि के उत्सव को खास बनाते हैं।

अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं तो सबसे जरूरी है कि पूजा को लेकर तनाव लेने के बजाय अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसे सरलता से करें। किसी विशेष अनुष्ठान या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंडित जी से सलाह लेना सबसे बेहतर रहेगा।

Disclaimer

अस्वीकरण: इस लेख में Shardiya Navratri 2026, Navratri 2026 की तिथियों, पूजा विधि, भोग, व्रत, कन्या पूजन और धार्मिक परंपराओं से संबंधित जानकारी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। तिथि और पूजा संबंधी जानकारी उपलब्ध पंचांग तथा पंडित जी से पुष्टि/सत्यापन के आधार पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। हालांकि अलग-अलग स्थानों के सूर्योदय, पंचांग गणना, तिथि और स्थानीय परंपराओं के कारण पूजा के समय में अंतर हो सकता है। विशेष रूप से अष्टमी, नवमी, कन्या पूजन, हवन और कलश स्थापना के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित/आचार्य से अंतिम पुष्टि अवश्य करें। BrajTrip.in किसी धार्मिक अनुष्ठान के परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

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