Anant Chaturdashi 2026: 24 या 25 सितंबर, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Anant chaturdashi 2026 Muhurt Pooja Vidhi

Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत व्रत से जुड़ा है। इसी दिन 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का भी समापन होता है और कई स्थानों पर Ganesh Anant Chaturdashi 2026 के अवसर पर गणपति विसर्जन किया जाता है।

साल 2026 में अनंत चतुर्दशी की तारीख को लेकर 24 और 25 सितंबर के बीच भ्रम देखने को मिल रहा है। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात शुरू होगी और 25 सितंबर की रात तक रहेगी। इसलिए अनंत चतुर्दशी 2026 का पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन गणेश विसर्जन भी किया जाएगा।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, अनंत सूत्र धारण करना, व्रत कथा सुनना और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने की परंपरा है। वहीं गणेश भक्तों के लिए यह दिन बप्पा को विदाई देने का भी विशेष अवसर होता है।


Anant Chaturdashi 2026 कब है? 24 या 25 सितंबर, जानें सही तारीख

Anant Chaturdashi 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाई जाएगी।

चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे समाप्त होगी। चूंकि 25 सितंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा की जाएगी।

विवरणसमय
अनंत चतुर्दशी25 सितंबर 2026, शुक्रवार
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ24 सितंबर, रात 11:18 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त25 सितंबर, रात 11:06 बजे
गणेश विसर्जन25 सितंबर 2026

ध्यान रखें कि पूजा और विसर्जन के मुहूर्त शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को अंतिम संदर्भ मानना बेहतर है।


Anant Chaturdashi 2026 पर तिथि और पूजन का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए दिन का लंबा शुभ समय उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, दिल्ली क्षेत्र के लिए अनंत चतुर्दशी का पूजा मुहूर्त लगभग सुबह 6:11 बजे से रात 11:06 बजे तक बताया गया है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे दिन एक ही तरह का पूजा-मुहूर्त रहता है। पूजा का वास्तविक समय स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग की गणना के अनुसार बदल सकता है।

अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो पूजा से पहले अपने शहर के पंचांग में स्थानीय समय जरूर देख लें।

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10 प्रमुख शहरों में Anant Chaturdashi 2026 के शुभ मुहूर्त

पूजा और गणेश विसर्जन के समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। विशेष रूप से गणेश विसर्जन के लिए स्थानीय चोघड़िया और प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।

नीचे 25 सितंबर को दिन के दौरान गणेश विसर्जन के लिए उपलब्ध प्रमुख शुभ समयों का एक व्यावहारिक संदर्भ दिया गया है। दिल्ली-NCR और मुंबई के लिए उपलब्ध पंचांग में सुबह, दोपहर और शाम के अलग-अलग समय दिए गए हैं।

शहरसुबह का समयदोपहर का समयशाम का समय
दिल्ली-NCR6:11–10:42 AM12:13–1:43 PM4:44–6:15 PM
मुंबई6:28–10:59 AM12:30–2:01 PM5:02–6:32 PM
पुणे6:24–10:56 AM12:26–1:57 PM4:58–6:29 PM
बेंगलुरु6:09–10:41 AM12:11–1:42 PM4:43–6:14 PM
हैदराबाद6:05–10:37 AM12:08–1:38 PM4:40–6:10 PM
चेन्नई5:58–10:30 AM12:01–1:31 PM4:33–6:03 PM
कोलकाता5:26–9:58 AM11:28 AM–12:59 PM4:00–5:31 PM
अहमदाबाद6:29–11:01 AM12:31–2:02 PM5:03–6:34 PM
जयपुर6:16–10:48 AM12:18–1:49 PM4:50–6:21 PM
नोएडा/गुरुग्राम6:11–10:42 AM12:13–1:43 PM4:44–6:15 PM

ये समय स्थानीय पंचांग गणना पर आधारित हैं। वास्तविक विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय या निर्धारित विसर्जन स्थल के नियमों को भी जरूर देखें।


अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? जानें इसका धार्मिक महत्व

अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित पर्व है। धार्मिक मान्यता में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में पूजा जाता है और इस दिन उनके अनंत रूप की आराधना की जाती है।

अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अनंत सूत्र धारण करते हैं। इस सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिन्हें धार्मिक परंपरा में 14 लोकों से जोड़ा जाता है।

यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है। परिवार के लोग एक साथ बैठकर कथा सुनते हैं, भगवान की आरती करते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं।


अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा क्यों की जाती है?

अनंत चतुर्दशी का मुख्य धार्मिक संबंध भगवान विष्णु से है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और उनके अनंत स्वरूप का स्मरण किया जाता है।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु को फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। कई परिवारों में इस दिन अनंत सूत्र की पूजा करने के बाद उसे धारण करने की परंपरा भी है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत जीवन में स्थिरता, सुख और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।


अगर आप अनंत चतुर्दशी के अवसर पर मथुरा में धार्मिक स्थलों के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो श्री कृष्ण जन्मस्थान के दर्शन समय, प्रवेश नियम और यात्रा से जुड़ी जानकारी पहले देख लें।

अनंत सूत्र क्या है और 14 गांठों वाला धागा क्यों बांधा जाता है?

अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत सूत्र का विशेष महत्व माना जाता है। यह सामान्यतः लाल या कुमकुम से रंगा हुआ धागा होता है, जिसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं।

इन 14 गांठों को धार्मिक परंपरा में 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद इसे भगवान विष्णु को समर्पित करके धारण किया जाता है।

अनंत सूत्र बांधने की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपने घर की परंपरा या स्थानीय पुरोहित द्वारा बताई गई विधि को प्राथमिकता देना उचित है।


अनंत चतुर्दशी पूजा के लिए जरूरी सामग्री

अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती। घर पर सामान्य रूप से उपलब्ध पूजा सामग्री से भी पूजा की जा सकती है।

पूजा सामग्री:

  • भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा
  • अनंत सूत्र
  • रोली और कुमकुम
  • अक्षत
  • हल्दी
  • फूल और माला
  • तुलसी दल
  • धूप और दीपक
  • पंचामृत
  • फल
  • मिठाई या नैवेद्य
  • जल से भरा कलश
  • नारियल
  • पान और सुपारी
  • पूजा की थाली
  • घी या तेल का दीपक

क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार सामग्री में कुछ बदलाव हो सकते हैं।


Anant Chaturdashi Puja Vidhi: Step-by-Step पूजा सामग्री और विधि

अगर आप घर पर अनंत चतुर्दशी की पूजा कर रहे हैं, तो इसे सरल तरीके से इस प्रकार कर सकते हैं।

1. पूजा स्थान की सफाई करें
सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थान को साफ करें और भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

2. कलश स्थापित करें
पूजा स्थान पर जल से भरा कलश रखें। उसमें आवश्यकतानुसार आम के पत्ते और नारियल रख सकते हैं।

3. भगवान विष्णु का पूजन करें
भगवान विष्णु को जल, पंचामृत, फूल, तुलसी, धूप और दीप अर्पित करें।

4. अनंत सूत्र की पूजा करें
14 गांठ वाले अनंत सूत्र को भगवान के सामने रखें और उसकी पूजा करें।

5. व्रत कथा सुनें या पढ़ें
पूजा के दौरान अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा पढ़ें या परिवार के साथ सुनें।

6. अनंत सूत्र धारण करें
पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सदस्य अपनी परंपरा के अनुसार अनंत सूत्र धारण कर सकते हैं।

7. आरती करें
अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।


अनंत चतुर्दशी पूजा में किन मंत्रों का जाप करें?

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। सरल मंत्र के रूप में आप:

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

का जाप कर सकते हैं।

इसके अलावा भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए विष्णु सहस्रनाम या विष्णु स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। मंत्रों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण पूजा में श्रद्धा और एकाग्रता को माना जाता है।


अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा

अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की महिमा बताई जाती है। प्रचलित कथा के अनुसार कौण्डिन्य ऋषि की पत्नी सुशीला ने अनंत भगवान की पूजा और अनंत सूत्र धारण किया था। इसके बाद उनके जीवन में सुख-समृद्धि आई।

कथा के अनुसार कौण्डिन्य ऋषि ने अनंत सूत्र के महत्व को न समझते हुए उसे उतार दिया। इसके बाद उनके जीवन में परेशानियां आने लगीं। बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान अनंत की उपासना की।

यह कथा इस बात पर जोर देती है कि अनंत चतुर्दशी के व्रत और पूजा को श्रद्धा तथा विश्वास के साथ करना चाहिए।


अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत में क्या खाएं और पारण कब करें?

व्रत रखने वाले लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार भोजन करते हैं। कुछ लोग निर्जल या केवल फलाहार रखते हैं, जबकि कई लोग फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और अन्य व्रत वाली चीजें खाते हैं।

अगर आप स्वास्थ्य कारणों से लंबा उपवास नहीं रख सकते, तो बिना भोजन किए रहने को जरूरी न मानें। अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।

नमक का उपयोग, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों को लेकर भी अलग-अलग परिवारों में अलग नियम हो सकते हैं।


अनंत चतुर्दशी के व्रत का पारण कब करें?

व्रत का पारण सामान्यतः पूजा और व्रत की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद किया जाता है। पारण के समय को लेकर क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपराओं में अंतर हो सकता है।

इसलिए केवल किसी दूसरे शहर के समय के आधार पर पारण न करें। अपने शहर के पंचांग में अनंत चतुर्दशी पारण समय जरूर देखें।


रवि योग का संयोग: अनंत चतुर्दशी पर क्या है इसका महत्व?

25 सितंबर 2026 के पंचांग में रवि योग का उल्लेख मिलता है।

हिंदू ज्योतिषीय परंपरा में रवि योग को शुभ योगों में गिना जाता है और इस दौरान किए जाने वाले धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।

हालांकि केवल योग देखकर पूजा का समय तय करना उचित नहीं है। पूजा के लिए तिथि, स्थानीय सूर्योदय और निर्धारित मुहूर्त को भी साथ में देखना चाहिए।


गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त और सही समय

Anant Chaturdashi Ganesh Visarjan 2026 के लिए मुख्य दिन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार है। यह गणेश उत्सव के 10वें दिन पड़ रहा है और इसी दिन बड़ी संख्या में घरों तथा सार्वजनिक पंडालों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

दिल्ली-NCR में उपलब्ध पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को गणेश विसर्जन के लिए सुबह 6:11 से 10:42 बजे, दोपहर 12:13 से 1:43 बजे और शाम 4:44 से 6:15 बजे के समय दिए गए हैं। मुंबई में सुबह 6:28 से 10:59 बजे, दोपहर 12:30 से 2:01 बजे और शाम 5:02 से 6:32 बजे के समय उपलब्ध हैं।

यहां एक बात समझना जरूरी है—विसर्जन के लिए धार्मिक मुहूर्त और स्थानीय प्रशासन द्वारा तय विसर्जन व्यवस्था दोनों अलग-अलग बातें हो सकती हैं। सार्वजनिक स्थान पर विसर्जन करते समय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।


गणेश विसर्जन कैसे करें? जानें आसान विधि

घर पर गणेश विसर्जन करने से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें।

सबसे पहले गणेश जी को फूल, दूर्वा, फल, मोदक और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और परिवार के सभी सदस्य भगवान गणेश से आशीर्वाद लें।

इसके बाद गणेश प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं। घर पर विसर्जन करने की स्थिति में स्थानीय नियमों के अनुसार छोटे पात्र या टब में स्वच्छ जल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रतिमा के विसर्जन के बाद उस जल का सम्मानपूर्वक उपयोग करें और प्लास्टर, प्लास्टिक या सजावटी सामग्री को जल में न डालें।


गणेश विसर्जन के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

विसर्जन के समय उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

  • प्रतिमा को ले जाते समय भीड़ में बच्चों पर नजर रखें।
  • नदी या तालाब में गहराई तक न जाएं।
  • प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल का उपयोग करें।
  • प्रतिमा के साथ प्लास्टिक, थर्मोकोल और अन्य गैर-जैविक सामग्री जल में न डालें।
  • बिजली के तारों और भीड़ वाले रास्तों से सावधान रहें।
  • ढोल-नगाड़े या जुलूस के दौरान यातायात नियमों का पालन करें।
  • घर पर विसर्जन करते समय पर्याप्त पानी वाले सुरक्षित पात्र का उपयोग करें।

किन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं करना चाहिए?

हर गणेश प्रतिमा को एक ही तरीके से विसर्जित करना जरूरी नहीं है। विशेष रूप से ऐसी प्रतिमाएं जिनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक, धातु या अन्य गैर-जैविक सजावटी सामग्री लगी हो, उन्हें प्राकृतिक जलस्रोत में विसर्जित करने से बचना चाहिए।

अगर प्रतिमा मिट्टी की है, तो घर पर छोटे पात्र में विसर्जन करके उस मिट्टी को पौधों या बगीचे में इस्तेमाल किया जा सकता है, यदि यह स्थानीय नियमों और प्रतिमा की सामग्री के अनुरूप हो।

धार्मिक परंपरा और पर्यावरण—दोनों का ध्यान रखते हुए विसर्जन करना बेहतर है।


Eco-Friendly Ganesh Visarjan कैसे करें?

पर्यावरण के लिहाज से मिट्टी की गणेश प्रतिमा का घर पर विसर्जन एक सरल विकल्प हो सकता है।

इसके लिए एक साफ बाल्टी या बड़े पात्र में पानी भरें और प्रतिमा को धीरे-धीरे उसमें रखें। प्रतिमा के पूरी तरह घुलने के बाद बची हुई मिट्टी को छानकर पौधों की मिट्टी में मिलाया जा सकता है, यदि प्रतिमा प्राकृतिक मिट्टी से बनी हो।

फूल, माला और पूजा सामग्री को अलग करके कम्पोस्ट या स्थानीय कचरा प्रबंधन व्यवस्था के अनुसार निपटाएं।

इस तरह गणेश विसर्जन की परंपरा भी निभाई जा सकती है और प्राकृतिक जलस्रोतों पर अनावश्यक दबाव भी कम किया जा सकता है।


Anant Chaturdashi 2026 FAQ

Q1. Anant Chaturdashi 2026 का धार्मिक महत्व क्या है?

Ans. अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत व्रत से जुड़ा पर्व है। इस दिन अनंत सूत्र धारण करने और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है।

Q2. अनंत चतुर्दशी का व्रत कौन रख सकता है?

Ans. अनंत चतुर्दशी का व्रत श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार रख सकते हैं। व्रत का तरीका परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है।

Q3. अनंत चतुर्दशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?

Ans. व्रत रखने वाले लोग सामान्यतः फल, दूध, दही और अन्य व्रत वाले खाद्य पदार्थ लेते हैं। अनाज और सामान्य भोजन से परहेज करने की परंपरा कई परिवारों में है, लेकिन नियम अलग हो सकते हैं।

Q4. अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र किस हाथ में बांधते हैं?

Ans. अनंत सूत्र बांधने की परंपरा में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर मिलता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा या पूजा कराने वाले पुरोहित के निर्देश का पालन करें।

Q5. 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का क्या महत्व है?

Ans. धार्मिक परंपरा में अनंत सूत्र की 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़ा जाता है। इसे भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

Q6. अनंत सूत्र कितने दिन तक बांधकर रखना चाहिए?

Ans. अनंत सूत्र कितने समय तक रखना है, इसे लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार इसे धारण और उतारना उचित है।

Q7. अनंत चतुर्दशी की पूजा में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

Ans. भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा, अनंत सूत्र, फूल, तुलसी, रोली, अक्षत, धूप, दीप, पंचामृत, फल, मिठाई, कलश और नारियल जैसी सामान्य पूजा सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है।

Q8. अनंत चतुर्दशी व्रत कथा का क्या महत्व है?

Ans. अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा भगवान अनंत की महिमा और श्रद्धा के महत्व से जुड़ी है। पूजा के दौरान कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है।

Q9. गणेश विसर्जन के बाद क्या करना चाहिए?

Ans. विसर्जन के बाद घर लौटकर भगवान की आरती और प्रार्थना की जा सकती है। पूजा की बची सामग्री को उचित तरीके से अलग करना चाहिए और जलस्रोत को प्रदूषित करने वाली सामग्री नहीं डालनी चाहिए।

Q10. गणेश विसर्जन के लिए घर पर क्या तैयारी करें?

Ans. एक साफ और पर्याप्त आकार का पात्र, स्वच्छ जल, पूजा सामग्री और प्रतिमा को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करें। घर पर विसर्जन करते समय बच्चों को पानी के पास अकेला न छोड़ें।

Q11. घर पर गणेश विसर्जन कैसे करें?

Ans. पहले गणेश जी की पूजा और आरती करें। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक साफ पानी वाले पात्र में विसर्जित करें। यदि प्रतिमा प्राकृतिक मिट्टी की है, तो बाद में बची मिट्टी को पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Q12. गणेश विसर्जन के बाद गणेश जी की पूजा कैसे करें?

Ans. विसर्जन के बाद घर में भगवान गणेश की तस्वीर या छोटी स्थायी प्रतिमा के सामने दीप जलाकर आरती की जा सकती है। परिवार के लोग भगवान गणेश से सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

Q13. अनंत चतुर्दशी और अनंत व्रत में क्या अंतर है?

Ans. अनंत चतुर्दशी एक पर्व/तिथि है, जबकि अनंत व्रत भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने से जुड़ी धार्मिक साधना है। दोनों का संबंध होने के कारण इन्हें अक्सर एक साथ संदर्भित किया जाता है।


Anant Chaturdashi 2026: एक नजर में

  • अनंत चतुर्दशी 2026: 25 सितंबर, शुक्रवार
  • चतुर्दशी तिथि शुरू: 24 सितंबर, रात 11:18 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर, रात 11:06 बजे
  • मुख्य आराध्य: भगवान विष्णु का अनंत स्वरूप
  • प्रमुख परंपरा: अनंत सूत्र धारण करना
  • अनंत सूत्र: 14 गांठ वाला सूत्र
  • गणेश विसर्जन: 25 सितंबर 2026
  • गणेश उत्सव: 14 सितंबर से 25 सितंबर तक
  • महाराष्ट्र में महत्व: अनंत चतुर्दशी गणेश उत्सव के समापन और बड़े स्तर पर गणेश विसर्जन से विशेष रूप से जुड़ी है।

नोट: पूजा, व्रत-पारण और विसर्जन के सटीक समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अंतिम समय तय करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या संबंधित पूजा स्थल/प्रशासन की जानकारी देख लें।

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